Thursday, October 14, 2010

तितली सा दीवाना....दिल...मेरा.

खुशियों का खज़ाना ..दिल तितली सा दीवाना ...
खबर न कुछ मुझे सुबह की..न शाम का टिकाना....
ज़िन्दगी लगे परियों का फ़साना
हर मोसम सुहाना..हर बात हंसी का बहाना
मंजिल के सफ़र की हर डगर पर ...
जब उसे महसूस करू अपने साथ हर कदम
खुश्बू उसकी हरदम मेरे आस पास...
ज़िन्दगी का हर अंदाज़ लगे मस्ताना....
दिल मेरा तितली सा दीवाना .......

दिल की उड़ान उस आसमान तक .......

इस आसमान से आगे भी एक आसमान है
जहा ख्वाइशओं का मुकाम है
जहाँ पंछियों के साथ सपनो की उड़ान है
मन की कोशिश है उस आसमान को छूने की
चाहत नहीं जानने  की मंजिल है कितनी दूर
मुकाम है इस आसमान तक .....
या इस आसमान से आगे का जहाँ
मैंने तो कर दी ज़िन्दगी सपनो के हवाले
हम भी न समझे दिल भी न समझे ......

कतरा कतरा भीगती जाती है पलके

कतरा कतरा भीगती जाती  है पलके
लम्हा लम्हा याद आते जा रहे हो
मेरी ही गलफ़त थी की नाम ले बैठी तेरा
दिल ने तो कितना कहा ....
माना अनिवार्य है जुदाई तेरी नज़र में
फिर क्यूँ है यह तीव्र वेदना मेरे मनं में
दिल में उठती है चीख  ....
जब महसूस करती हूँ ....
तुम्हारा मौन तुम्हारी दूरी
और अपनी बेबसी
फिर भी  सो जाती हूँ लेकर डबडबायी आँखें
ह्रदय में समेटे स्वप्न और एक आशा .....
की कभी हम दोबारा साथ चलेगे
ज़िन्दगी  की इसी डगर पर ......

Friday, October 1, 2010

वक़्त है की थमता नहीं ....................

वक़्त है की थमता नहीं
आस है की निखरती नहीं 
कांच से है खवाब .......
उनकी चुबन आँखों से मिटती  नहीं
दिल के टूटने की आवाज़ .....
यह शोर क्यूँ थमता नहीं......
हर वक़्त जिसका ख्याल मेरे आस पास
उसकी परछाई क्यूँ चेहरे से हटती नहीं
पल दो पल क्यूँ संभलता नहीं यह दिल ..
ज़िन्दगी अपने हिसाब से क्यूँ चलती नहीं .....