वक़्त है की थमता नहीं
आस है की निखरती नहीं
कांच से है खवाब .......
उनकी चुबन आँखों से मिटती नहीं
दिल के टूटने की आवाज़ .....
यह शोर क्यूँ थमता नहीं......
हर वक़्त जिसका ख्याल मेरे आस पास
उसकी परछाई क्यूँ चेहरे से हटती नहीं
पल दो पल क्यूँ संभलता नहीं यह दिल ..
ज़िन्दगी अपने हिसाब से क्यूँ चलती नहीं .....
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