Monday, September 27, 2010

हमने यह कभी सोचा न था............

हमने यह कभी सोचा न था दूरियां ऐसी भी होंगी 
साथ तो  होगा वो  मेरे ............
पर वो  मेरा न था .......
अक्स तो मौजूद है पर अक्स तन्हाई का है
आईना तो है आज भी उसकी आँखें
पर उसमे चेहरा मेरा  न था .....
आज उसने अपने दर्द से भी जुदा कर दिया
उसकी आँख की नमी में परछाई मेरी न थी 
आज में रोई ..पर साथ मेरे वो रोया न था 
यह सब वीरानियाँ उसके जुदा होने से है
आँख धुन्द्लाई हुई है मेरी
कायनात  धुन्द्लाई  नहीं है ......
भूल जाने के सिवा अब कोई चारा नहीं
क्यूंकि यादों की रौशनी और
तन्हाई के आंसू से भी
उसे वापिस मेरे पास आना न था .....

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