तुझे भुला के भी आँखों की क्यूँ नमी जाती नहीं
तेरा प्यार भुला के भी क्यूँ नफरत पनपती नहीं
कई बार चाहा की तुझे बुला लूँ या भुला दूँ
तेरा यह एहसास क्यूँ मेरे दिल से मिटता नहीं
यह रिश्ता एक एहसास है तेरे और मेरे बीच.......
पर फिर क्यूँ इसकी ख़ुशी तेरी आँखों में झलकती नहीं
क्यूँ इसकी टूटने की तकलीफ तेरे दिल तक पहुँचती नहीं ....
कई बार चाहा की तुझे आवाज़ दे कर वापिस बुला लूँ ...
पर क्यूँ मेरी आवाज़ तेरे दिल तक पहुँचती नहीं ...
कई बार चाहा की तुझे भुला दूँ ...
पर क्यूँ मेरे दिल का शोर थमता नहीं ..
क्यूँ तेरे साथ बिताये पल भूलते नहीं ..
क्यूँ यह अँधेरा छंटता नहीं ...
क्यूँ तेरा एहसास मेरे दिल से मिटता नहीं ....
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