Saturday, November 27, 2010

शोर ........

शोर ..एक छोटा सा शब्द ..पर कितना कुछ अपने अन्दर समाहित किये हुए .....सड़क पर खेलते हुए बच्चो का शोर हमें अपने बचपन में ले जाता है ..उनके खेल का शोर ..उनकी हंसी का शोर हमें दिल से ख़ुशी  देता है....हमे सकूँ देता है ......बारिश की बूंदों का शोर...चिड़िया की चहचाहट का शोर .. हम में उमंग भर देता है .....और यही शब्द शोर  जब किसी दो लोगो के बीच की बहस का होता है तो दिल को तकलीफ देता है ...एक कटाश का शोर एक चुभुन  देता है .... रिश्तो में कडवाहट लता है .....और जब यह शोर किसी दो लोगो के बीच की चुप्पी का होता है .....तो वो  शोर आवाज़ नहीं करता पर सबसे ज्यादा दिलो में दूरी पैदा करता है ....वो शोर बेबस होता है और उस शोर को कोई आवाज़ दबा नहीं सकती ....

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